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mahabharat 3.16.20: राजा! उस गदा के प्रहार से वह वेगवान पृथ्वी पर इस प्रकार गिर पड़ा, मानो कोई जड़ सहित पुराना वृक्ष वायु के वेग से टूटकर गिर पड़ा हो।   |   mahabharat अध्याय 3.16: शाल्वकी विशाल सेनाके आक्रमणका यादवसेनाद्वारा प्रतिरोध, साम्बद्वारा क्षेमवृद्धिकी पराजय, वेगवान‍्का वध तथा चारुदेष्णद्वारा विविन्ध्य दैत्यका वध एवं प्रद्युम्नद्वारा सेनाको आश्वासन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 16: शाल्वकी विशाल सेनाके आक्रमणका यादवसेनाद्वारा प्रतिरोध, साम्बद्वारा क्षेमवृद्धिकी पराजय, वेगवान‍्का वध तथा चारुदेष्णद्वारा विविन्ध्य दैत्यका वध एवं प्रद्युम्नद्वारा सेनाको आश्वासन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.16.20 
तया त्वभिहतो राजन् वेगवान्न्यपतद् भुवि।
वातरुग्ण इव क्षुण्णो जीर्णमूलो वनस्पति:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
राजा! उस गदा के प्रहार से वह वेगवान पृथ्वी पर इस प्रकार गिर पड़ा, मानो कोई जड़ सहित पुराना वृक्ष वायु के वेग से टूटकर गिर पड़ा हो।
 
King! Being struck by that mace, the swift one fell on the ground as if an old tree with decayed roots had been broken and fell down by the force of the wind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)