Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.158.97-98: 'भीमसेन! यहाँ समान लय में गाये जाने वाले गीतों और सामन्तों की नाना ध्वनियाँ सुनाई देती हैं, जो समस्त प्राणियों के मन को आकर्षित करती हैं। यह परम पवित्र एवं मंगलमय दिव्य नदी महागंगा है, जाकर इसका दर्शन करो।' | mahabharat अध्याय 3.158: नर-नारायण-आश्रमसे वृषपर्वाके यहाँ होते हुए राजर्षि आर्ष्टिषेणके आश्रमपर जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गीतानां समतालानां तथा साम्नां च नि:स्वन:॥ ९७॥
श्रूयते बहुधा भीम सर्वभूतमनोहर:।
महागङ्गामुदीक्षस्व पुण्यां देवनदीं शुभाम्॥ ९८॥
अनुवाद
'भीमसेन! यहाँ समान लय में गाये जाने वाले गीतों और सामन्तों की नाना ध्वनियाँ सुनाई देती हैं, जो समस्त प्राणियों के मन को आकर्षित करती हैं। यह परम पवित्र एवं मंगलमय दिव्य नदी महागंगा है, जाकर इसका दर्शन करो।'
'Bhimsena! Here one can hear the various sounds of songs and Sammantras sung in equal rhythm, which attracts the mind of all creatures. This is the most sacred and auspicious divine river Maha Ganga, go and see it.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥