श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 157: जटासुरके द्वारा द्रौपदीसहित युधिष्ठिर,नकुल, सहदेवका हरण तथा भीमसेनद्वारा जटासुरका वध  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  3.157.46 
यं चासि प्रस्थितो देशं मन: पूर्वं गतं च ते।
न तं गन्तासि गन्तासि मार्गं बकहिडिम्बयो:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
जिस देश की ओर तुम चल पड़े हो और जहाँ तुम्हारा मन पहुँच चुका है, वहाँ अब तुम नहीं जा सकोगे। तुम्हें बक और हिडिम्बा के मार्ग का अनुसरण करना होगा॥ 46॥
 
‘The country towards which you have set out and where your mind has already reached, you will not be able to go there now. You have to follow the path of Bak and Hidimba.॥ 46॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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