श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 157: जटासुरके द्वारा द्रौपदीसहित युधिष्ठिर,नकुल, सहदेवका हरण तथा भीमसेनद्वारा जटासुरका वध  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.157.19 
राष्ट्रस्यारक्ष्यमाणस्य कुतो भूति: कुत: सुखम्।
न च राजावमन्तव्यो रक्षसा जात्वनागसि॥ १९॥
 
 
अनुवाद
'यदि हम राष्ट्र की रक्षा न करें, तो वह कैसे समृद्ध होगा और सुख कैसे पाएगा? राक्षस को भी बिना किसी दोष के राजा का अपमान नहीं करना चाहिए॥19॥
 
'How will the nation prosper and find happiness if it is not protected by us? Even a demon should never insult a king without any fault.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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