Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.155.5: सारी दिशाएँ लाल हो गईं, मृग और पक्षी कर्कश शब्द करने लगे, सारा जगत अंधकार से ढक गया और किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था ॥5॥ | mahabharat अध्याय 3.155: भयंकर उत्पात देखकर युधिष्ठिर आदिकी चिन्ता और सबका गन्धमादन-पर्वतपर सौगन्धिकवनमें भीमसेनके पास पहुँचना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सलोहिता दिशश्चासन् खरवाचो मृगद्विजा:।
तमोवृतमभूत् सर्वं न प्राज्ञायत किंचन॥ ५॥
अनुवाद
सारी दिशाएँ लाल हो गईं, मृग और पक्षी कर्कश शब्द करने लगे, सारा जगत अंधकार से ढक गया और किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था ॥5॥
All directions turned red, deer and birds started making harsh sounds, the entire world was covered in darkness and no one could understand anything. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥