श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 154: भीमसेनके द्वारा क्रोधवश नामक राक्षसोंकी पराजय और द्रौपदीके लिये सौगन्धिक कमलोंका संग्रह करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.154.24 
तत: स पीत्वामृतकल्पमम्भो
भूयो बभूवोत्तमवीर्यतेजा:।
उत्पाटॺ जग्राह च सोऽम्बुजानि
सौगन्धिकान्युत्तमगन्धवन्ति॥ २४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उस अमृत के समान मधुर सरोवर का जल पीकर वह पुनः महान् बल और तेज से युक्त हो गया और उत्तम सुगन्धवाले सुगन्धित कमलों को तोड़कर इकट्ठा करने लगा॥24॥
 
Thereafter, after drinking the water of that lake as sweet as nectar, he again became full of great strength and brilliance and started plucking and collecting the fragrant lotuses having the best fragrance. 24॥
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