श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 154: भीमसेनके द्वारा क्रोधवश नामक राक्षसोंकी पराजय और द्रौपदीके लिये सौगन्धिक कमलोंका संग्रह करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.154.17 
तत: स गुर्वीं यमदण्डकल्पां
महागदां काञ्चनपट्टनद्धाम्।
प्रगृह्य तानभ्यपतत् तरस्वी
ततोऽब्रवीत् तिष्ठत तिष्ठतेति॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तब भीमसेन ने यमदण्ड के समान विशाल और भारी, सोने के पत्र से मढ़ी हुई एक गदा उठाई और उसे लेकर बड़े वेग से राक्षसों पर टूट पड़े और ललकारते हुए बोले, 'खड़े हो जाओ, खड़े हो जाओ।'॥17॥
 
Then Bhimasena picked up a mace as huge and heavy as the Yama-danda, covered with gold leaf. With that he rushed upon the demons with great force and shouted in a challenging voice, 'Stand, stand'.॥17॥
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