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श्लोक 3.154.11  |
इयं च नलिनी रम्या जाता पर्वतनिर्झरे।
नेयं भवनमासाद्य कुबेरस्य महात्मन:॥ ११॥ |
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| अनुवाद |
| यह सुन्दर सरोवर पर्वतीय झरनों से निकला है; यह महामनस्वी कुबेर के घर में नहीं है ॥11॥ |
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| This beautiful lake has emerged from mountain springs; it is not in the home of the great-minded Kubera. ॥11॥ |
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