श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 150: श्रीहनुमान‍्जीके द्वारा भीमसेनको अपने विशाल रूपका प्रदर्शन और चारों वर्णोंके धर्मोंका प्रतिपादन  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  3.150.49 
निग्रहे प्रग्रहे सम्यग् यदा राजा प्रवर्तते।
तदा भवति लोकस्य मर्यादा सुव्यवस्थिता॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
जब राजा संयम और अनुकूलतापूर्वक उचित आचरण करता है, तभी प्रजा की मर्यादा सुरक्षित रहती है ॥49॥
 
When the King behaves properly in restraint and favour, then only the dignity of the people remains safe. ॥ 49॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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