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श्लोक 3.150.48  |
बुद्धॺा स्वप्रतिपन्नेषु कुर्यात् साधुष्वनुग्रहम्।
निग्रहं चाप्यशिष्टेषु निर्मर्यादेषु कारयेत्॥ ४८॥ |
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| अनुवाद |
| बुद्धिपूर्वक विचार करके अपने शरणागत और शुभ कर्म करने वाले मनुष्यों पर दया करनी चाहिए और मर्यादा तोड़ने वाले दुष्ट मनुष्यों को दण्ड देना चाहिए ॥48॥ |
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| After thinking wisely, one should show mercy to the people who take refuge in Him and do good deeds and punish the evil people who break the decorum. 48॥ |
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