श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 150: श्रीहनुमान‍्जीके द्वारा भीमसेनको अपने विशाल रूपका प्रदर्शन और चारों वर्णोंके धर्मोंका प्रतिपादन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  3.150.38 
वृद्धै: सम्मन्त्र्य सद्भिश्च बुद्धिमद्भि: श्रुतान्वितै:।
आस्थित: शास्ति दण्डेन व्यसनी परिभूयते॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
वेदों के विद्वान, बुद्धिमान और महान् वृध्दों की कृपा प्राप्त करके उनका अनुग्रह प्राप्त करने वाला राजा ही दण्डनीति से शासन कर सकता है। दुर्गुणों में आसक्त राजा पराजित होता है ॥38॥
 
Only a king who has earned the favor of the learned, wise and great elders of the Vedas and has gained their favor can rule through the policy of punishment. The king who is addicted to vices is defeated. 38॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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