श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 150: श्रीहनुमान‍्जीके द्वारा भीमसेनको अपने विशाल रूपका प्रदर्शन और चारों वर्णोंके धर्मोंका प्रतिपादन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.150.31 
त्रयी वार्ता दण्डनीतिस्तिस्रो विद्या विजानताम्।
ताभि: सम्यक् प्रयुक्ताभिर्लोकयात्रा विधीयते॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
वेदत्रयी, वार्ता (कृषि-वाणिज्य आदि) और दण्डनीति - ये तीन विद्याएँ हैं (इनमें वेदाध्ययन ब्राह्मणों की जीविका है, वार्ता वैश्यों की और दण्डनीति क्षत्रियों की जीविका है)। विद्वानों द्वारा इन वृत्तियों के समुचित उपयोग से लोगों की यात्रा सफल होती है। 31॥
 
Vedatrayee, Varta (agriculture-commerce etc.) and Dandaneeti – these are the three sciences (among these, Vedadhyayan is the livelihood of Brahmins, Varta of Vaishyas and Dandaneeti is the livelihood of Kshatriyas). By the proper use of these instincts by learned men, the journey of the people is accomplished. 31॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd