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mahabharat 3.15.18: हे भरतश्रेष्ठ! इन्द्रभवन के समान द्वारका नगरी सुरक्षित, गुप्त और अस्त्र-शस्त्रों से परिपूर्ण है॥18॥   |   mahabharat अध्याय 3.15: सौभनाशकी विस्तृत कथाके प्रसंगमें द्वारकामें युद्धसम्बन्धी रक्षात्मक तैयारियोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 15: सौभनाशकी विस्तृत कथाके प्रसंगमें द्वारकामें युद्धसम्बन्धी रक्षात्मक तैयारियोंका वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.15.18 
सुरक्षितं सुगुप्तं च सर्वायुधसमन्वितम्।
तत् पुरं भरतश्रेष्ठ यथेन्द्रभवनं तथा॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! इन्द्रभवन के समान द्वारका नगरी सुरक्षित, गुप्त और अस्त्र-शस्त्रों से परिपूर्ण है॥18॥
 
Bharatshrestha! Like Indra Bhavan, Dwarka city is safe, secret and full of weapons. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)