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mahabharat 3.15.17: हे निष्पाप राजा! द्वारका स्वभाव से ही दुर्गम, सुरक्षित और अस्त्र-शस्त्रों से परिपूर्ण है, तथापि उस समय उसके लिए विशेष व्यवस्था की गई थी ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 3.15: सौभनाशकी विस्तृत कथाके प्रसंगमें द्वारकामें युद्धसम्बन्धी रक्षात्मक तैयारियोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 15: सौभनाशकी विस्तृत कथाके प्रसंगमें द्वारकामें युद्धसम्बन्धी रक्षात्मक तैयारियोंका वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.15.17 
प्रकृत्या विषमं दुर्गं प्रकृत्या च सुरक्षितम्।
प्रकृत्या चायुधोपेतं विशेषेण तदानघ॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे निष्पाप राजा! द्वारका स्वभाव से ही दुर्गम, सुरक्षित और अस्त्र-शस्त्रों से परिपूर्ण है, तथापि उस समय उसके लिए विशेष व्यवस्था की गई थी ॥17॥
 
Sinless king! Dwarka is by nature inaccessible, safe and full of weapons, however, special arrangements were made for it at that time. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)