Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.149.33: इस प्रकार द्वापरयुग के आते ही लोग अधर्म के कारण दुर्बल होने लगते हैं। (उसके बाद कलियुग आता है।) कुन्तीनन्दन! कलियुग में धर्म की स्थापना एक ही अवस्था से होती है। 33॥ | mahabharat अध्याय 3.149: हनुमान्जीके द्वारा चारों युगोंके धर्मोंका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं द्वापरमासाद्य प्रजा: क्षीयन्त्यधर्मत:।
पादेनैकेन कौन्तेय धर्म: कलियुगे स्थित:॥ ३३॥
अनुवाद
इस प्रकार द्वापरयुग के आते ही लोग अधर्म के कारण दुर्बल होने लगते हैं। (उसके बाद कलियुग आता है।) कुन्तीनन्दन! कलियुग में धर्म की स्थापना एक ही अवस्था से होती है। 33॥
In this way, with the arrival of Dwaparayuga, people start weakening due to unrighteousness. (After that Kaliyuga arrives.) Kuntinandan! In Kaliyuga, religion is established from only one stage. 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥