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mahabharat 3.147.32: पिता की आज्ञा का पालन करने के लिए वे अपनी पत्नी सीता और छोटे भाई लक्ष्मण के साथ दण्डकारण्य में आये। धनुर्धरों में श्रेष्ठ रघुनाथजी सदैव धनुष-बाण धारण करते थे। 32॥   |   mahabharat अध्याय 3.147: श्रीहनुमान् और भीमसेनका संवाद   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.147.32 
स पितु: प्रियमन्विच्छन् सहभार्य: सहानुज:।
सधनुर्धन्विनां श्रेष्ठो दण्डकारण्यमाश्रित:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
पिता की आज्ञा का पालन करने के लिए वे अपनी पत्नी सीता और छोटे भाई लक्ष्मण के साथ दण्डकारण्य में आये। धनुर्धरों में श्रेष्ठ रघुनाथजी सदैव धनुष-बाण धारण करते थे। 32॥
 
To obey his father's orders, he came to Dandakaranya with his wife Sita and younger brother Lakshman. Raghunathji, the best among archers, always carried a bow and arrow. 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)