श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान‍्जीसे भेंट  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  3.146.94 
कारुण्यात् त्वामहं वीर वारयामि निबोध मे।
नात: परं त्वया शक्यं गन्तुमाश्वसिहि प्रभो॥ ९४॥
 
 
अनुवाद
हे वीर! मैं दयावश तुम्हें आगे जाने से रोक रहा हूँ। मेरी बात सुनो। प्रभु! तुम यहाँ से आगे किसी भी प्रकार नहीं जा सकते। इस पर विश्वास करो। ॥94॥
 
Brave one! I am stopping you from going further out of pity. Listen to me. Lord! You cannot go further from here in any way. Believe this. ॥94॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)