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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान्जीसे भेंट
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श्लोक 93
श्लोक
3.146.93
विना सिद्धगतिं वीर गतिरत्र न विद्यते।
देवलोकस्य मार्गोऽयमगम्यो मानुषै: सदा॥ ९३॥
अनुवाद
वीर! इस स्थान में सिद्ध पुरुषों के अतिरिक्त अन्य कोई प्रवेश नहीं कर सकता। यह देवलोक का मार्ग है, जो मनुष्यों के लिए सर्वदा दुर्गम है ॥ 93॥
Brave! No one other than the perfect men can enter this place. This is the path to Devlok, which is always inaccessible to humans. ॥ 93॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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