श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान‍्जीसे भेंट  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  3.146.88 
वयं धर्मं न जानीमस्तिर्यग्योनिमुपाश्रिता:।
नरास्तु बुद्धिसम्पन्ना दयां कुर्वन्ति जन्तुषु॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
हम पशु योनि के प्राणी हैं, इसलिए धर्म के विषय में कुछ नहीं जानते; परन्तु मनुष्य बुद्धिमान हैं, इसलिए वे सब जीवों पर दया करते हैं ॥88॥
 
We are creatures of the animal species, so we do not know anything about religion; but humans are intelligent, so they show mercy to all living beings. ॥ 88॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)