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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान्जीसे भेंट
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श्लोक 64
श्लोक
3.146.64
सिंहनादभयत्रस्तै: कुञ्जरैरपि भारत।
मुक्तो विराव: सुमहान् पर्वतो येन पूरित:॥ ६४॥
अनुवाद
उन सिंहोंकी गर्जना सुनकर भयभीत हाथी भी चिंघाड़ने लगे, जिससे वह विशाल पर्वत शब्दसे गूंज उठा ॥64॥
On hearing the roar of those lions, the frightened elephants also began to scream, due to which that huge mountain resounded with sound. ॥ 64॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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