श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान‍्जीसे भेंट  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  3.146.63 
तं वज्रनिष्पेषसममास्फोटितमहारवम्।
श्रुत्वा शैलगुहासुप्तै: सिंहैर्मुक्तो महास्वन:॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
पर्वतों पर गिरने वाली बिजली की भयंकर ध्वनि सुनकर गुफाओं में सोये हुए सिंह भी जोर-जोर से दहाड़ने लगे।
 
On hearing the terrifying sound of the thunderbolts striking the mountains, even the lions sleeping in the caves began to roar loudly. 63.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)