श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान‍्जीसे भेंट  »  श्लोक 61-62
 
 
श्लोक  3.146.61-62 
दध्मौ च शङ्खं स्वनवत् सर्वप्राणेन पाण्डव:।
आस्फोटयच्च बलवान् भीम: संनादयन् दिश:॥ ६१॥
तस्य शङ्खस्य शब्देन भीमसेनरवेण च।
बाहुशब्देन चोग्रेण नदन्तीव गिरेर्गुहा:॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
उस समय बलवान पाण्डवपुत्र भीमसेन ने अपनी पूरी शक्ति लगाकर बड़े जोर से शंख बजाया और उसकी ध्वनि समस्त दिशाओं में गूंज उठी। ऐसा प्रतीत हुआ मानो पर्वतों की गुफाएँ शंख की ध्वनि, भीमसेन की गर्जना और उनकी करतल ध्वनि की भयंकर ध्वनि से गूंज उठीं।
 
At that time, the powerful son of Pandava, Bhima, used all his might to blow his conch with great force and made it echo in all directions. It was as if the caves of the mountains resounded with the sound of the conch, Bhimasena's roar and the terrible sound of his clapping.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)