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mahabharat 3.146.43-44: सूअर, हिरणों के झुंड, जंगली भैंसे, बाघ, सियारों और गायों के समूह - ये सभी एक साथ चिंघाड़ने लगे। चक्रवाक, चातक, हंस, करंडव, प्लव, शुक, कोकिल और क्रौंच आदि पक्षी अचेत होकर भिन्न-भिन्न दिशाओं में शरण लेने लगे। 43-44.   |   mahabharat अध्याय 3.146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान‍्जीसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान‍्जीसे भेंट  »  श्लोक 43-44
 
 
श्लोक  3.146.43-44 
वराहमृगसंघाश्च महिषाश्च वनेचरा:।
व्याघ्रगोमायुसंघाश्च प्रणेदुर्गवयै: सह॥ ४३॥
रथाङ्गसाह्वदात्यूहा हंसकारण्डवप्लवा:।
शुका: पुंस्कोकिला: क्रौञ्चा विसंज्ञा भेजिरे दिश:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
सूअर, हिरणों के झुंड, जंगली भैंसे, बाघ, सियारों और गायों के समूह - ये सभी एक साथ चिंघाड़ने लगे। चक्रवाक, चातक, हंस, करंडव, प्लव, शुक, कोकिल और क्रौंच आदि पक्षी अचेत होकर भिन्न-भिन्न दिशाओं में शरण लेने लगे। 43-44.
 
Pigs, herds of deer, wild buffaloes, tigers, groups of jackals and cows - all of them started screaming together. Birds like Chakravaak, Chatak, Swan, Karandava, Plav, Shuk, Kokil and Krauncha became unconscious and took refuge in different directions. 43-44.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)