श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान‍्जीसे भेंट  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.146.28 
प्रांशु: कनकवर्णाभ: सिंहसंहननो युवा।
मत्तवारणविक्रान्तो मत्तवारणवेगवान्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
वह बहुत लंबा था। उसका रंग सोने जैसा चमक रहा था। उसके सारे अंग सिंह के समान बलवान थे। वह युवावस्था में प्रवेश कर चुका था। वह मदमस्त हाथी की तरह उन्मुक्त चाल से चलता था। उसकी गति पागल हाथी जैसी थी।
 
He was very tall. His complexion shone like gold. All his limbs were as strong as a lion. He had entered his youth. He walked with a carefree gait like a drunken elephant. His speed was like that of a mad elephant.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)