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mahabharat 3.146.24: वहाँ अप्सराओं की पायल की मधुर ध्वनि पर सुन्दर मोर नाच रहे थे। उस पर्वत के प्रत्येक रत्न और शिला पर दैत्यों के दाँतों की रगड़ के निशान थे।   |   mahabharat अध्याय 3.146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान‍्जीसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान‍्जीसे भेंट  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.146.24 
अप्सरोनूपुररवै: प्रनृत्तवरबर्हिणम्।
दिग्वारणविषाणाग्रैर्घृष्टोपलशिलातलम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
वहाँ अप्सराओं की पायल की मधुर ध्वनि पर सुन्दर मोर नाच रहे थे। उस पर्वत के प्रत्येक रत्न और शिला पर दैत्यों के दाँतों की रगड़ के निशान थे।
 
There, beautiful peacocks were dancing to the sweet sound of the anklets of the Apsaras. Every gem and rock on that mountain had marks of the rubbing of the teeth of the giants.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)