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mahabharat 3.145.26: राजन! तत्पश्चात् पाण्डवों ने ब्राह्मणों सहित भगवान नारायण के उस रमणीय स्थान का दर्शन किया॥26॥   |   mahabharat अध्याय 3.145: घटोत्कच और उसके साथियोंकी सहायतासे पाण्डवोंका गन्धमादन पर्वत एवं बदरिकाश्रममें प्रवेश तथा बदरीवृक्ष,नर-नारायणाश्रम और गंगाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 145: घटोत्कच और उसके साथियोंकी सहायतासे पाण्डवोंका गन्धमादन पर्वत एवं बदरिकाश्रममें प्रवेश तथा बदरीवृक्ष,नर-नारायणाश्रम और गंगाका वर्णन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.145.26 
ततस्तमाश्रमं रम्यं नरनारायणाश्रितम्।
ददृशु: पाण्डवा राजन् सहिता द्विजपुङ्गवै:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
राजन! तत्पश्चात् पाण्डवों ने ब्राह्मणों सहित भगवान नारायण के उस रमणीय स्थान का दर्शन किया॥26॥
 
Rajan! Thereafter, the Pandavas along with the Brahmins together visited that delightful place of Lord Narayan. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)