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mahabharat 3.145.16: वहाँ अनेक नदियाँ बह रही थीं। अनेक प्रकार के पक्षी विचरण कर रहे थे। वह स्थान नाना प्रकार के मृगों से सुसज्जित था और वानरों से सुशोभित था।   |   mahabharat अध्याय 3.145: घटोत्कच और उसके साथियोंकी सहायतासे पाण्डवोंका गन्धमादन पर्वत एवं बदरिकाश्रममें प्रवेश तथा बदरीवृक्ष,नर-नारायणाश्रम और गंगाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 145: घटोत्कच और उसके साथियोंकी सहायतासे पाण्डवोंका गन्धमादन पर्वत एवं बदरिकाश्रममें प्रवेश तथा बदरीवृक्ष,नर-नारायणाश्रम और गंगाका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.145.16 
नदीजालसमाकीर्णान्नानापक्षियुतान् बहून्।
नानाविधमृगैर्जुष्टान् वानरैश्चोपशोभितान्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वहाँ अनेक नदियाँ बह रही थीं। अनेक प्रकार के पक्षी विचरण कर रहे थे। वह स्थान नाना प्रकार के मृगों से सुसज्जित था और वानरों से सुशोभित था।
 
There were many rivers flowing everywhere. Innumerable birds of many kinds were roaming around. That place was served by various kinds of deer and was decorated with monkeys.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)