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mahabharat 3.143.21: झाग की नावों से भरे हुए विशाल जल को अपने साथ ले जाने वाली नदियाँ गिरे हुए वृक्षों को अपनी लहरों में समेट रही थीं और 'हर-हर' की ऊँची ध्वनि करते हुए बह रही थीं।   |   mahabharat अध्याय 3.143: गन्धमादनकी यात्राके समय पाण्डवोंका आँधी-पानीसे सामना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 143: गन्धमादनकी यात्राके समय पाण्डवोंका आँधी-पानीसे सामना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.143.21 
वहन्त्यो वारि बहुलं फेनोडुपपरिप्लुतम्।
परिसस्रुर्महाशब्दा: प्रकर्षन्त्यो महीरुहान्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
झाग की नावों से भरे हुए विशाल जल को अपने साथ ले जाने वाली नदियाँ गिरे हुए वृक्षों को अपनी लहरों में समेट रही थीं और 'हर-हर' की ऊँची ध्वनि करते हुए बह रही थीं।
 
The rivers, carrying the vast expanse of water filled with boats of foam, were gathering the fallen trees in their waves and were flowing while making a loud sound of 'Har-Har'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)