Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.142.63: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! यह वृत्तांत सुनकर सभी पाण्डव अत्यन्त प्रसन्न हुए और लोमशजी के बताये हुए मार्ग पर शीघ्रतापूर्वक आगे बढ़े। | mahabharat अध्याय 3.142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! यह वृत्तांत सुनकर सभी पाण्डव अत्यन्त प्रसन्न हुए और लोमशजी के बताये हुए मार्ग पर शीघ्रतापूर्वक आगे बढ़े।
Vaishmpayana says - Janamejaya! On hearing this story all the Pandavas became very happy and quickly proceeded ahead on the route shown by Lomasha.
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि तीर्थयात्रापर्वणि लोमशतीर्थयात्रायां गन्धमादनप्रवेशे द्विचत्वारिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत तीर्थयात्रापर्वमें लोमशतीर्थयात्राके प्रसंगमें गन्धमादनप्रवेशविषयक एक सौ बयालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥