Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.142.6: सामगान करने वाले विद्वान् यहाँ वेदमंत्रों की पुण्यध्वनि फैलाते हुए सामवेद की ऋचाओं का गायन करते हैं। मरीचि, पुलह, भृगु और अंगिरा भी यहाँ जप और स्वाध्याय करते हैं। 6॥   |   mahabharat अध्याय 3.142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.142.6 
अत्र साम स्म गायन्ति सामगा: पुण्यनि:स्वना:।
मरीचि: पुलहश्चैव भृगुश्चैवाङ्गिरास्तथा॥ ६॥
 
 
अनुवाद
सामगान करने वाले विद्वान् यहाँ वेदमंत्रों की पुण्यध्वनि फैलाते हुए सामवेद की ऋचाओं का गायन करते हैं। मरीचि, पुलह, भृगु और अंगिरा भी यहाँ जप और स्वाध्याय करते हैं। 6॥
 
The scholars performing Samagan sing the verses of Samaveda here while spreading the virtuous sound of Veda mantras. Marichi, Pulah, Bhrigu and Angira also do chanting and self-study here. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)