Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.142.22-24: 'उस समय समस्त देवताओं और ऋषियों ने उनकी स्तुति की। उनके देखते ही प्रज्वलित किरणों से सुशोभित भगवान अग्निदेव का तेज नष्ट हो गया। श्रीहरि के तेज से वे विह्वल हो गए। सम्पूर्ण देव समुदाय के स्वामी और वर देने वाले भगवान विष्णु को देखकर वज्रधारी इन्द्र ने हाथ जोड़कर तथा बार-बार सिर झुकाकर उन्हें प्रणाम किया। तत्पश्चात उन्होंने भगवान से वे सब बातें कहीं जिनके कारण वे उस दैत्य से भयभीत थे। 22-24॥ | mahabharat अध्याय 3.142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'उस समय समस्त देवताओं और ऋषियों ने उनकी स्तुति की। उनके देखते ही प्रज्वलित किरणों से सुशोभित भगवान अग्निदेव का तेज नष्ट हो गया। श्रीहरि के तेज से वे विह्वल हो गए। सम्पूर्ण देव समुदाय के स्वामी और वर देने वाले भगवान विष्णु को देखकर वज्रधारी इन्द्र ने हाथ जोड़कर तथा बार-बार सिर झुकाकर उन्हें प्रणाम किया। तत्पश्चात उन्होंने भगवान से वे सब बातें कहीं जिनके कारण वे उस दैत्य से भयभीत थे। 22-24॥
'At that time all the gods and sages praised him. As soon as he saw them, the glory of Lord Agnidev, adorned with blazing rays, was almost destroyed. He was disgusted by the glory of Sri Hari. After seeing Lord Vishnu, the lord of the entire community of gods and the giver of blessings, Indra, wielding the thunderbolt, saluted him with folded hands and bowed his head again and again. After that he told all those things to God due to which he was afraid of that demon. 22-24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥