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mahabharat 3.142.2-3: पाण्डवों! यह मार्ग दिव्य मंदराचल तक ले जाएगा। अब तुम सब शांत और एकाग्र हो जाओ। यह देवताओं का निवास है, जिस पर तुम्हें चलना होगा। पुण्य कर्म करने वाले दिव्य ऋषिगण भी यहीं निवास करते हैं॥ 2-3॥   |   mahabharat अध्याय 3.142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  3.142.2-3 
पर्वतं मन्दरं दिव्यमेष पन्था: प्रयास्यति।
समाहिता निरुद्विग्ना: सर्वे भवत पाण्डवा:॥ २॥
अयं देवनिवासो वै गन्तव्यो वो भविष्यति।
ऋषीणां चैव दिव्यानां निवास: पुण्यकर्मणाम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
पाण्डवों! यह मार्ग दिव्य मंदराचल तक ले जाएगा। अब तुम सब शांत और एकाग्र हो जाओ। यह देवताओं का निवास है, जिस पर तुम्हें चलना होगा। पुण्य कर्म करने वाले दिव्य ऋषिगण भी यहीं निवास करते हैं॥ 2-3॥
 
Pandavas! This path will lead to the divine Mandaraachal. Now all of you become calm and focused. This is the abode of the gods, on which you will have to walk. The divine sages who perform pious deeds also reside here.॥ 2-3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)