श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 139: पाण्डवोंकी उत्तराखण्ड-यात्रा और लोमशजीद्वारा उसकी दुर्गमताका कथन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.139.19 
वैशम्पायन उवाच
ततोऽब्रवीद् भीममुदारवीर्यं
कृष्णां यत्त: पालय भीमसेन।
शून्येऽर्जुनेऽसंनिहिते च तात
त्वामेव कृष्णा भजते भयेषु॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! तत्पश्चात् राजा युधिष्ठिर ने महाबली भीमसेन से इस प्रकार कहा - 'भ्राता भीमसेन! सावधान रहो और द्रौपदी की रक्षा करो। पिताश्री! किसी निर्जन स्थान में, जहाँ अर्जुन हमारे निकट न हों, भय होने पर द्रौपदी आपकी ही शरण लेती है।'॥19॥
 
Vaishampayana says - Janamejaya! Thereafter King Yudhishthira spoke to the mighty Bhima thus - 'Brother Bhimasena! Be cautious and protect Draupadi. Father! In any deserted place when Arjuna is not near us, Draupadi takes shelter in you only when there is a fear.'॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)