Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.139.18: युधिष्ठिर ने कहा - भाइयो! आज महर्षि लोमश अत्यन्त घबराये हुए हैं। यह एक अभूतपूर्व घटना है। अतः तुम सब लोग सावधान रहो और द्रौपदी की रक्षा करो। प्रमाद मत करो। लोमशजी इस क्षेत्र को अत्यन्त दुर्गम मानते हैं। अतः यहाँ अत्यन्त शुद्ध आचार और विचार से रहो॥ 18॥ | mahabharat अध्याय 3.139: पाण्डवोंकी उत्तराखण्ड-यात्रा और लोमशजीद्वारा उसकी दुर्गमताका कथन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर उवाच
अपूर्वोऽयं सम्भ्रमो लोमशस्य
कृष्णां च सर्वे रक्षत मा प्रमादम्।
देशो ह्ययं दुर्गतमो मतोऽस्य
तस्मात् परं शौचमिहाचरध्वम्॥ १८॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने कहा - भाइयो! आज महर्षि लोमश अत्यन्त घबराये हुए हैं। यह एक अभूतपूर्व घटना है। अतः तुम सब लोग सावधान रहो और द्रौपदी की रक्षा करो। प्रमाद मत करो। लोमशजी इस क्षेत्र को अत्यन्त दुर्गम मानते हैं। अतः यहाँ अत्यन्त शुद्ध आचार और विचार से रहो॥ 18॥
Yudhishthira said - Brothers! Today Maharishi Lomash is very nervous. This is an unprecedented incident. Therefore, all of you be cautious and protect Draupadi. Do not be negligent. Lomashji thinks that this region is very inaccessible. Therefore, live here with very pure conduct and thoughts.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥