श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 139: पाण्डवोंकी उत्तराखण्ड-यात्रा और लोमशजीद्वारा उसकी दुर्गमताका कथन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.139.13 
तान् विगाहस्व पार्थाद्य तपसा च दमेन च।
रक्ष्यमाणो मया राजन् भीमसेनबलेन च॥ १३॥
 
 
अनुवाद
महाराज कुन्तीपुत्र! भीमसेन के बल और मेरी तपस्या से तुम सुरक्षित हो। आज तुम तपस्या करते हुए और अपनी इन्द्रियों को वश में करते हुए उन तीर्थों में स्नान करो।॥13॥
 
Maharaja Kunti's son! You are protected by Bhimasena's strength and my austerities. Today, while practicing austerity and controlling your senses, take a bath in those holy places. ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)