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mahabharat 3.138.2: बुद्धिमान बृहद्द्युम्न ने यज्ञ के लिए रैभ्य के दोनों पुत्रों अर्वावसु और परावसु को अपना सहयोगी बनाया ॥2॥   |   mahabharat अध्याय 3.138: अर्वावसुकी तपस्याके प्रभावसे परावसुका ब्रह्महत्यासे मुक्त होना और रैभ्य,भरद्वाज तथा यवक्रीत आदिका पुनर्जीवित होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 138: अर्वावसुकी तपस्याके प्रभावसे परावसुका ब्रह्महत्यासे मुक्त होना और रैभ्य,भरद्वाज तथा यवक्रीत आदिका पुनर्जीवित होना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.138.2 
तेन रैभ्यस्य वै पुत्रावर्वावसुपरावसू।
वृतौ सहायौ सत्रार्थं बृहद्‍‍द्युम्नेन धीमता॥ २॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान बृहद्द्युम्न ने यज्ञ के लिए रैभ्य के दोनों पुत्रों अर्वावसु और परावसु को अपना सहयोगी बनाया ॥2॥
 
The wise Brihaddyumna made Raibhya's two sons, Arvavasu and Paravasu, his allies for the performance of the yagya. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)