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mahabharat 3.138.10: अर्वावसु ने कहा - भाई! तुम परम बुद्धिमान राजा बृहद्द्युम्न का यज्ञ करो और मैं इन्द्रियों को वश में करके तुम्हारे लिए ब्रह्म हत्या का प्रायश्चित करूँगा।   |   mahabharat अध्याय 3.138: अर्वावसुकी तपस्याके प्रभावसे परावसुका ब्रह्महत्यासे मुक्त होना और रैभ्य,भरद्वाज तथा यवक्रीत आदिका पुनर्जीवित होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 138: अर्वावसुकी तपस्याके प्रभावसे परावसुका ब्रह्महत्यासे मुक्त होना और रैभ्य,भरद्वाज तथा यवक्रीत आदिका पुनर्जीवित होना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.138.10 
अर्वावसुरुवाच
करोतु वै भवान् सत्रं बृहद्‍‍द्युम्नस्य धीमत:।
ब्रह्मवध्यां चरिष्येऽहं त्वदर्थं नियतेन्द्रिय:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
अर्वावसु ने कहा - भाई! तुम परम बुद्धिमान राजा बृहद्द्युम्न का यज्ञ करो और मैं इन्द्रियों को वश में करके तुम्हारे लिए ब्रह्म हत्या का प्रायश्चित करूँगा।
 
Arvavasu said – Brother! You perform the yagya of the most intelligent king Brihaddyumna and I will atone for the murder of Brahma for you by controlling the senses.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)