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mahabharat 3.137.7: राक्षस हाथ में भाला लिए उसका पीछा कर रहा था और वह अग्नि कक्ष में प्रवेश कर रहा था। उस समय मैंने उसे दोनों हाथों से पकड़ लिया और प्रवेश द्वार पर ही रोक दिया।   |   mahabharat अध्याय 3.137: भरद्वाजका पुत्रशोकसे विलाप करना, रैभ्यमुनिको शाप देना एवं स्वयं अग्निमें प्रवेश करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 137: भरद्वाजका पुत्रशोकसे विलाप करना, रैभ्यमुनिको शाप देना एवं स्वयं अग्निमें प्रवेश करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.137.7 
प्रकाल्यमानस्तेनायं शूलहस्तेन रक्षसा।
अग्न्यागारं प्रति द्वारि मया दोर्भ्यां निवारित:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
राक्षस हाथ में भाला लिए उसका पीछा कर रहा था और वह अग्नि कक्ष में प्रवेश कर रहा था। उस समय मैंने उसे दोनों हाथों से पकड़ लिया और प्रवेश द्वार पर ही रोक दिया।
 
The demon was chasing him with a spear in his hand and he was entering the fire chamber. At that time I caught hold of him with both my hands and stopped him at the entrance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)