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mahabharat 3.137.18: मैंने अपने पुत्र को मरते देखा और अपने प्रिय मित्र को शाप दिया। मेरे सिवा संसार में ऐसा दुःख और कौन भोगेगा?॥18॥   |   mahabharat अध्याय 3.137: भरद्वाजका पुत्रशोकसे विलाप करना, रैभ्यमुनिको शाप देना एवं स्वयं अग्निमें प्रवेश करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 137: भरद्वाजका पुत्रशोकसे विलाप करना, रैभ्यमुनिको शाप देना एवं स्वयं अग्निमें प्रवेश करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.137.18 
परासुश्च सुतो दृष्ट: शप्तश्चेष्ट: सखा मया।
ईदृशीमापदं कोऽत्र द्वितीयोऽनुभविष्यति॥ १८॥
 
 
अनुवाद
मैंने अपने पुत्र को मरते देखा और अपने प्रिय मित्र को शाप दिया। मेरे सिवा संसार में ऐसा दुःख और कौन भोगेगा?॥18॥
 
I saw my son die and cursed my dear friend. Who else in the world apart from me will experience such a tragedy?॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)