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mahabharat 3.137.14: पुत्र! रैभ्य के इस क्रूर कर्म के कारण आज मुझे अपने पुत्र को खोने का दुःख सहना पड़ा है। तुम्हारे बिना मैं इस पृथ्वी पर अपने सबसे प्रिय जीवन को भी त्याग देता।॥14॥   |   mahabharat अध्याय 3.137: भरद्वाजका पुत्रशोकसे विलाप करना, रैभ्यमुनिको शाप देना एवं स्वयं अग्निमें प्रवेश करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 137: भरद्वाजका पुत्रशोकसे विलाप करना, रैभ्यमुनिको शाप देना एवं स्वयं अग्निमें प्रवेश करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.137.14 
पुत्रशोकमनुप्राप्त एष रैभ्यस्य कर्मणा।
त्यक्ष्यामि त्वामृते पुत्र प्राणानिष्टतमान् भुवि॥ १४॥
 
 
अनुवाद
पुत्र! रैभ्य के इस क्रूर कर्म के कारण आज मुझे अपने पुत्र को खोने का दुःख सहना पड़ा है। तुम्हारे बिना मैं इस पृथ्वी पर अपने सबसे प्रिय जीवन को भी त्याग देता।॥14॥
 
Son! Today I have suffered the grief of losing my son due to this cruel deed of Raibhya. Without you I would even give up my most beloved life on this earth.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)