श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 136: यवक्रीतका रैभ्यमुनिकी पुत्रवधूके साथ व्यभिचार और रैभ्यमुनिके क्रोधसे उत्पन्न राक्षसके द्वारा उसकी मृत्यु  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.136.5 
तत एकान्तमुन्नीय मज्जयामास भारत।
आजगाम तदा रैभ्य: स्वमाश्रममरिंदम॥ ५॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं का नाश करने वाले भरत! तब यवक्रीत ने उसे एकांत स्थान में ले जाकर पापसागर में डुबो दिया। (उसके साथ मैथुन किया।) इतने में रैभ्य मुनि उसके आश्रम पर आये। 5.
 
Bharat, destroyer of enemies! Then Yavkrit took her to a secluded place and drowned her in the ocean of sins. (He had sexual relations with her.) Meanwhile, Raibhya Muni came to his ashram. 5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)