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mahabharat 3.136.4: यवक्रीत का सद्गुण जानकर भी वह उसके शाप से भयभीत हो गई। साथ ही उसे रैभ्य ऋषि का तेज भी स्मरण हो आया। अतः 'बहुत अच्छा' कहकर वह उनके पास आई। ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 3.136: यवक्रीतका रैभ्यमुनिकी पुत्रवधूके साथ व्यभिचार और रैभ्यमुनिके क्रोधसे उत्पन्न राक्षसके द्वारा उसकी मृत्यु   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 136: यवक्रीतका रैभ्यमुनिकी पुत्रवधूके साथ व्यभिचार और रैभ्यमुनिके क्रोधसे उत्पन्न राक्षसके द्वारा उसकी मृत्यु  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.136.4 
सा तस्य शीलमाज्ञाय तस्माच्छापाच्च बिभ्यती।
तेजस्वितां च रैभ्यस्य तथेत्युक्त्वाऽऽजगाम ह॥ ४॥
 
 
अनुवाद
यवक्रीत का सद्गुण जानकर भी वह उसके शाप से भयभीत हो गई। साथ ही उसे रैभ्य ऋषि का तेज भी स्मरण हो आया। अतः 'बहुत अच्छा' कहकर वह उनके पास आई। ॥4॥
 
Even after knowing Yavakrit's good nature, she was afraid of his curse. At the same time, she also remembered the brilliance of sage Raibhya. So, saying 'very good', she came to him. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)