श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 136: यवक्रीतका रैभ्यमुनिकी पुत्रवधूके साथ व्यभिचार और रैभ्यमुनिके क्रोधसे उत्पन्न राक्षसके द्वारा उसकी मृत्यु  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.136.18 
स वै प्रविशमानस्तु शूद्रेणान्धेन रक्षिणा।
निगृहीतो बलाद् द्वारि सोऽवातिष्ठत पार्थिव॥ १८॥
 
 
अनुवाद
राजा ! उस समय अग्निहोत्र कक्ष के अन्दर शूद्र वर्ण का एक रक्षक तैनात था, जो दोनों आँखों से अंधा था। ज्यों ही यवक्रीत द्वार में आया, उसने बलपूर्वक उसे पकड़ लिया और यवक्रीत वहीं खड़ा रहा॥18॥
 
King! At that time a guard belonging to the Shudra caste was posted inside the Agnihotra room, who was blind in both eyes. As soon as Yavakrit entered the door, he forcefully caught him and Yavakrit stood there.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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