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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 136: यवक्रीतका रैभ्यमुनिकी पुत्रवधूके साथ व्यभिचार और रैभ्यमुनिके क्रोधसे उत्पन्न राक्षसके द्वारा उसकी मृत्यु  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.136.17 
स काल्यमानो घोरेण शूलहस्तेन रक्षसा।
अग्निहोत्रं पितुर्भीत: सहसा प्रविवेश ह॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तब यवक्रीत अत्यन्त भयभीत होकर, हाथ में भाला लिये हुए उस भयंकर राक्षस द्वारा पीछा किये जाने पर, सहसा अपने पिता के अग्निस्थान में प्रवेश करने लगा।
 
Then Yavakrit, greatly frightened, chased by that terrible demon with a spear in his hand, suddenly started entering his father's fire-place.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)