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mahabharat 3.136.12: तब क्रोध में भरे हुए ऋषि ने कहा, ‘यवक्रीत को मार डालो।’ फिर ‘बहुत अच्छा’ कहकर वे दोनों यवक्रीत को मार डालने की इच्छा से उसका पीछा करने लगे॥12॥   |   mahabharat अध्याय 3.136: यवक्रीतका रैभ्यमुनिकी पुत्रवधूके साथ व्यभिचार और रैभ्यमुनिके क्रोधसे उत्पन्न राक्षसके द्वारा उसकी मृत्यु   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 136: यवक्रीतका रैभ्यमुनिकी पुत्रवधूके साथ व्यभिचार और रैभ्यमुनिके क्रोधसे उत्पन्न राक्षसके द्वारा उसकी मृत्यु  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.136.12 
तावब्रवीदृषि: क्रुद्धो यवक्रीर्वध्यतामिति।
जग्मतुस्तौ तथेत्युक्त्वा यवक्रीतजिघांसया॥ १२॥
 
 
अनुवाद
तब क्रोध में भरे हुए ऋषि ने कहा, ‘यवक्रीत को मार डालो।’ फिर ‘बहुत अच्छा’ कहकर वे दोनों यवक्रीत को मार डालने की इच्छा से उसका पीछा करने लगे॥12॥
 
Then the sage, filled with anger, said, 'Kill Yavakrit.' Then saying, 'Very good,' both of them began to pursue Yavakrit with the intention of killing him.॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)