श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.135.9 
एष रैभ्याश्रम: श्रीमान् पाण्डवेय प्रकाशते।
भारद्वाजो यत्र कविर्यवक्रीतो व्यनश्यत॥ ९॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुनन्दन! रायभ्यक का यह सुन्दर आश्रम प्रकाशित हो रहा है, जहाँ विद्वान भारद्वाजपुत्र यवक्रित का नाश हुआ था। 9॥
 
Pandunandan! This beautiful ashram of Raibhyaka is being published, where the scholar Bharadwajaputra Yavakrit was destroyed. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)