vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु
»
श्लोक 24
श्लोक
3.135.24
घोरेण तपसा राजंस्तप्यमानो महत् तप:।
संतापयामास भृशं देवेन्द्रमिति न: श्रुतम्॥ २४॥
अनुवाद
हे राजन! उसने घोर तपस्या करके देवताओं के राजा इन्द्र को बहुत कष्ट पहुँचाया था; यह बात हम सुन चुके हैं।
O King! By accumulating great austerities through severe penance he greatly distressed the King of the Gods, Indra; we have heard of this.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×