श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.135.20 
स्वाध्यायार्थं समारम्भो ममायं पाकशासन।
तपसा ज्ञातुमिच्छामि सर्वज्ञानानि कौशिक॥ २०॥
 
 
अनुवाद
पक्षासन! मेरा यह आयोजन केवल स्वाध्याय के लिए है। कौशिक! मैं तप द्वारा समस्त विषयों का ज्ञान प्राप्त करना चाहता हूँ।
 
Pakshasan! This event of mine is only for self-study. Kaushik! I want to acquire knowledge of all things through penance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)