vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु
»
श्लोक 20
श्लोक
3.135.20
स्वाध्यायार्थं समारम्भो ममायं पाकशासन।
तपसा ज्ञातुमिच्छामि सर्वज्ञानानि कौशिक॥ २०॥
अनुवाद
पक्षासन! मेरा यह आयोजन केवल स्वाध्याय के लिए है। कौशिक! मैं तप द्वारा समस्त विषयों का ज्ञान प्राप्त करना चाहता हूँ।
Pakshasan! This event of mine is only for self-study. Kaushik! I want to acquire knowledge of all things through penance.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×