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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु
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श्लोक 18
श्लोक
3.135.18
तत इन्द्रो यवक्रीतमुपगम्य युधिष्ठिर।
अब्रवीत् कस्य हेतोस्त्वमास्थितस्तप उत्तमम्॥ १८॥
अनुवाद
युधिष्ठिर! तब इन्द्र ने यवक्रीत के पास आकर कहा - 'तुम यह उत्तम तप क्यों कर रहे हो?'॥18॥
Yudhishthira! Then Indra came to Yavakrit and said, 'Why are you performing this supreme penance?'॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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