श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 134: बन्दी और अष्टावक्रका शास्त्रार्थ, बन्दीकी पराजय तथा समङ्गामें स्नानसे अष्टावक्रके अंगोंका सीधा होना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.134.37 
लोमश उवाच
समुत्थितेष्वथ सर्वेषु राजन्
विप्रेषु तेष्वधिकं सुप्रभेषु।
अनुज्ञातो जनकेनाथ राज्ञा
विवेश तोयं सागरस्योत बन्दी॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
लोमश कहते हैं - हे राजन! जब बंदी द्वारा जल में डुबोये गये सभी ब्राह्मण अधिक तेजस्वी रूप में वहाँ प्रकट हुए, तब राजा की आज्ञा पाकर बंदी ने भी स्वयं समुद्र के जल में डुबकी लगा ली।
 
Lomasha says - O King! When all the Brahmins who had been immersed in water by Bandi appeared there in a more radiant form, then taking the king's order Bandi himself immersed himself in the water of the ocean. 37.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)